गांवों को रहने लायक बनाने के लिए सबसे ज़रूरी है कि इन्हें साफ़ किया जाय. क्रिया ने सफाई की दिशा में जो ज़रूरी कदम उठाए वे है शौचालय निर्माण की पहल. सेनेटरी नैपकिन यूनिट, कुंए की सफाई, ध्वनि प्रदुषण के खिलाफ पहल,रिश्वतखोरी के खिलाफ़ मूहीम, बेरोजगारी के खिलाफ़ पहल,

शौचालय निर्माण की पहल.:  

शौचालय निर्माण की पहल: 2015 के अक्टूबर महीने में पहली बार उत्तरी बिहार के गांवों में घुमते हुए हमें लगा कि लगभग समान रूप से प्रत्येक गांव की सड़के खुले में शौच के कारण पैदल आने जाने लायक नहीं रह गयी हैं. ज़मीन के साथ साथ हवा और जल, और इतना प्रदूषित हो चूका है कि इसका सीधा असर लोगों के स्वास्थ्य पर पड रहा है.

गांवो में लोगों से बात करने पर पता चला कि स्वच्छ भारत मिशन के तहत शौचालय निर्माण के लिए मिलने वाली प्रोत्साहन राशि का लाभ खुले में शौच के लिए विवश अत्यंत निर्धन परिवारों को नहीं मिल पा रहा है.

क्रिया ने सबसे पहले मनीगाछी प्रखंड के ब्रह्मपुरा-भट्टपुरा पंचायत में कोई सौ परिवारों को शौचालय बनवाने और उसे इस्तेमाल करने की प्रेरणा देने की पहल की.

निवेदिता पाठक और डॉ श्याम आनंद झा ब्रह्मपुरा, भटपुरा, सखवार, चनौर, आदि आस पास के गांव गए.  सभाएं कीं, लोगों से शौचालय बनाने और उनका इस्तेमाल करने का आग्रह किया.

 लोगों की सामान्य शिकायत थी कि शौचालय निर्माण के बाद मिलने वाली आर्थिक सहायता के लिए ग्राम पंचायत के प्रतिनिधि खुले आम रिश्वत मांगते हैं. दूसरी समस्या यह थी कि खुले में शौच के लिए जाने को विवश परिवार किसी भी हालत में 12000 रूपये खर्च कर शौचालय बनवाने की स्थिति में नहीं थे.

चुनौती थी कि इस प्रूरी प्रक्रिया में बड़े स्तर पर चल रहे रिश्वत खोरी को बंद किया जाय और कुछ संसाधन का प्रबंध किया जाय ताकि शौचालय निर्माण का काम हो सके.

हमने तत्कालीन जिलाधिकारी, दरभंगा, कुमार रवि से बात की और उनसे मिलकर एक प्रारूप पर काम शुरू किया. इसके तहत क्रिया ने स्वयं से शौचालय के निर्माण में अक्षम परिवार के लिए शौचालय के लिए ज़रूरी सामान व मिस्त्री की व्यवस्था उधार में की, और शौचालय के निर्माण के उपरांत मिलने वाली सरकारी सहायता से उधार का भुगतान किया. इस मॉडल का नाम हमने ब्रह्मपुरा मॉडल रखा.

यह मॉडल काफी लोकप्रिय हुआ. और हम इस भ्रम को तोड़ने में सफल हो गए कि 12000 रूपये में सरकार द्वारा अनुशंसित मॉडल का शौचालय नहीं बन सकता. 20 फरवरी 2016 को बलामुर्गन डी, जिलाधिकारी दरभंगा, हमारे काम को देखने ब्रह्मपुरा आए और हमारे मॉडल की खुले दिल से प्रशंसा की.

ब्रह्मपुरा के बाद आस पास के कई गांवों से ब्रह्मपुरा मॉडल पर शौचालय बनवाने की मांग आई! दरभंगा जिला में हमने लगभग 1000 से ज्यादा परिवारों को शौचालय के निर्माण में हमने मदद पहुंचाई है. यह सिलसिला आज भी जारी है.

चुनौतियाँ : केंद्र और राज्य सरकार का जोर है कि पंचायत दर पंचायत खुले में शौच से मुक्त हों. इसके लिए सरकारी एजेंसी हर संभव कोशिश कर रही है. मगर दो समस्याएँ है जिनकी तरफ प्रशासन का ध्यान जाना ज्यादा ज़रूरी है. एक तो यह कि ऐसे कई परिवार प्रत्येक पंचायत में हैं जिनके पास शौचालय बनवाने के लिए अपनी ज़मीन नहीं है. अत: स्वच्छ भारत योजना के अंतर्गत ऐसे लोग अपने शौचालय के निर्माण में अक्षम हैं. प्रखंड/अंचल स्तर के अधिकारी की यह जिम्मेदारी बनती है कि वे ऐसे निर्भुम परिवार के लिए ज़मीन उपलब्ध करवाएं.

दूसरी समस्या आती है भुगतान को लेकर. इलाके में कई ऐसे परिवार हैं जो अपना शौचालय इसलिए बनवाने से हिचक रहे हैं कि प्रोत्साहन के रूप में मिलने वाली राशि के बारे में उनकी आशंका अभी भी बनी हुई है कि पैसे कैसे मिलेंगे, कितने दिन में मिलेंगे और नहीं मिले तो वो क्या करेंगे.    

 
सेनेटरी नैपकिन यूनिट:
 
सस्ते दर पर सेनेटरी पैड की सहज उपलब्धता नहीं होने के कारण निर्धन परिवार की लड़कियों और महिलाओं को भारी कठिनाई का सामना करना पड़ता है. क्रिया ने विशेषकर इन महिलाओं के लिए सेनेटरी पैड बनाने का फ़ैसला किया. हमने एक टीम बनाई. घरों से फटी पुरानी सूती साडी और धोती मांगी, कुछ सिलाई मशीने खरीदीं, और सेनेटरी पैड बनाने का काम शुरू किया. टीम के सदस्य बनाने और बेचने दोनों का काम करते.

बाद में बिहार इलेक्ट्रॉनिक्स कारपोरेशन ने अपने सीएसआर फण्ड से हमें एक सेनेटरी पैड बनाने कि एक यूनिट बिठाने के लिए ज़रूरी आर्थिक सहायता दी.

 आर्थिक सहायता के आ जाने के बाद समस्या थी कि इसके लिए ज़रूरी जगह (भवन) की व्यवस्था कैसे हो? क्रिया के उपाध्यक्ष श्री अजित कुमार मिश्र ने सुझाव दिया कि दरभंगा जिला खादी ग्रामोद्योग संघ का मनीगाछी स्थित परिसर का इस्तेमाल इस ज़रुरी काम के लिए किया जा सकता है.

जब हमने मनीगाछी परिसर का मुआयना किया तो लगा कि इन परिसरों का जीर्णोद्धार अपने आप में एक काम है.

खादी ग्रामोद्योग संघ के अध्यक्ष माननीय भगवती बाबू और मंत्री श्री निरंजन कुमार मिश्र को हमारा यह  प्रस्ताव कि हम इस परित्यक्त परिसरों का पुनर्विकास ग्रामोद्योग सम्बन्धी गतिविधि के लिए करें, पसंद आया. आज हम साथ मिलकर आगे काम करते रहने के लिए तैयार हैं.

कुंए और तालाब की सफाई:


 मनीगाछी के गांव ब्रह्मपुरा, भटपुरा सखवार, में करीब 100 से ऊपर कुंए हैं. ये कुंएं कोई 20 25 साल पहले तक इस्तेमाल में थे. क्रमश: इन कुँओं का इस्तेमाल बंद हो गया. बंद पड़े ये कुंएं आज भी बरसाती पानी को पुन: रिचार्ज करने के कारगर माध्यम हैं. इधर कुछ वर्षों में इन कुँओं को कचड़े और अन्य विषैली वस्तुओं से भरने का खतरनाक काम हो रहा. क्रिया ने इस पंचायत के सभी कुँओं के उडाहीकरण की जिम्मेदारी उठाई है.

कमोबेश यही हालत यहाँ के तालाबों की है. नहाने धोने के लिए इस्तेमाल में बंद होने के बाद से मनीगाछी प्रखंड के तालाबों के रखरखाव पर बिलकुल ही ध्यान नहीं दिया जा रहा. बढती आवादी के कारण तालाबों पर अतिक्रमण अलग से हो रहे हैं. ‘तालाब बचाओ अभियान’, दरभंगा के साथ मिलकर क्रिया पर्यावरण में तालाब के महत्व को लेकर लोगों के बीच जन जागरण का काम कर रही है.

 
ध्वनि प्रदुषण:


उत्तरी बिहार के ग्रामीण इलाके में ध्वनी प्रदूषण एक जानलेवा समस्या के रूप में सामने आ रहा है. पुलिस की दुरुस्त पहुँच और लोगों के बीच प्रदूषण सम्बन्धी क़ानून की जानकारी के अभाव में डीजे के धंधे में लगे मुट्ठी भर लोगों ने आम आदमी का जीना मोहाल कर रखा है. क्रिया ने इस मामले में जीरो टोलरेन्स की नीति अपनाई है. 10 बजे रात के बाद जैसे ही कहीं से कोई आवाज़ आती है क्रिया के सदस्य सम्बंधित पुलिस अधिकारी को फोन पर सूचना दे देते हैं. हमारी नीति है कि जब तक पुलिस की कारवाई से बाजा का बजना बंद नहीं हो जाता हमें फोन करते रहना है.


रिश्वतखोरी के खिलाफ लड़ाई 


हमारी सबसे बड़ी लड़ाई है रिश्वतखोरी के खिलाफ़. पंचायती राज व्यवस्था जिसके सही क्रियान्वयन से गाँव की हालत में आमूल चूल परिवर्तन हो सकता है, आज भ्रष्ट्राचार का अड्डा बना हुआ है. पंचायत ब्रह्मपुरा भटपुरा के मुखिया पर के मनरेगा योजना के तहत लाखों रूपये डकार जाने का आरोप है. क्रिया ने इस मामले की जांच की पहल की. आरोपी मुखिया के खिलाफ़ जांच चल रही है.

क्रिया के हस्तक्षेप से पहले शौचालय के भुगतान में भी भारी रिश्वत का प्रावधान था. होता ये था कि पंचायत के मुखिया की मिलीभगत से एक एक पुराने शौचालय पर कई कई लाभुक ग़लत आवेदन देकर सहायता राशि लूट ले रहे थे. क्रिया ने इस प्रथा का पुरजोर विरोध कर इसे बंद करवाया है. आज मनीगाछी प्रखंड में शायद ही किसी व्यक्ति को अपने नए शौचालय के भुगतान के लिए किसी किस्म का कोई रिश्वत देना पड़े.

 
आरटीआई सम्बंधित गतिविधि:


क्रिया स्थानीय प्रशासनिक निकायों में चल रही धांधलीबाजी को रोकने के लिए आरटीआई के माध्यम से सूचना लेने और उन्हें आम जनता के बीच प्रचारित-प्रसारित करने का काम करती है. वर्ष 2015 में हमने आरटीआई के माध्यम से सरिसब पाही के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की  अतिक्रमित हो गई ज़मीन को फिर स्वाथ्य केंद्र को वापिस दिलाने में सफल रहे.   

 
रोजगार के अवसर:


क्रिया का एक मुख्य काम है ग्रामोद्योग की स्थापना और रोजगार के अवसर पैदा करना. क्रिया अपनी सेनेटरी नैपकिन यूनिट के लिए भीख मांगकर गुजर करने वाली महिलाओं और लड़कियों को प्रशिक्षित करने का काम कर रही है ताकि इन्हें मुख्यधारा में शामिल किया जा सके.क्रिया ने शौचालय निर्माण की प्रक्रिया में अब तक सैकड़ों राजमिस्त्री , मजदूर और अन्य प्रबंधनकर्मियों के लिए रोजगार के अवसर उत्पन्न किये हैं. Type your paragraph here.

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